अनाहत चक्र

मूलाधार चक्र से लेकर  सहस्रार चक्र तक ऊर्जा का सतत प्रवाह हो जाना ही कुंडलिनी जागरण है।
जब तक चक्र प्रकाशित नहीं होते तब तक कुंडलिनी उर्जा सही तरीके से अपने विराट स्वरूप को प्रदर्शित नहीं कर पाती।

अनाहत चक्र

सीने के बीच में ह्रदय के पास इसका स्थान है।
यह 12 सुनहरे दलों वाला चौथा चक्र है, इसका रंग हरा है।
इस चक्र के नीचे तीन चक्र है और ऊपर तीन चक्र है।

अनाहत चक्र के जाग्रत होने के फायदे

  • इस चक्र पर ध्यान लगाने से आपके दिल और दिमाग के बीच संतुलन पैदा होता है
  • इस चक्र पर ध्यान लगाने से आप अपने भावनाओं को अच्छी तरह से संभालना सीख जाएंगे

अनाहत चक्र जागृत होने के लक्षण

  • अनाहत का मतलब है ध्वनि जो बिना किसी दो चीजों के स्पर्श से हो रही है,
    हालाकि ध्वनि दो चीजों के टकराने से होती है लेकिन यह ऐसी ध्वनि है जिसे कोई बजा नहीं रहा यह किसी स्पर्श से भी नहीं हो रही है बस ध्यान करने से यह सुनाई देती है
    यह अलग-अलग प्रकार की  ध्वनियां होती है जैसे कि झींगुर की आवाज, वीणा, घंटी की आवाज, बांसुरी की आवाज या नगाड़े बजने की आवाज या फिर डमरू की आवाज

कुंडलिनी जागरण के चक्रों के अनुसार लक्षण