मूलाधार चक्र से लेकर सहस्रार चक्र तक ऊर्जा का सतत प्रवाह हो जाना ही कुंडलिनी जागरण है।
जब तक चक्र प्रकाशित नहीं होते तब तक कुंडलिनी उर्जा सही तरीके से अपने विराट स्वरूप को प्रदर्शित नहीं कर पाती।

मणिपुर चक्र
मणिपुर चक्र आपकी नाभि के बिंदु पर स्थित है, यह आपका नाभि केंद्र है। आपके सेहत के अहम पहलु में से एक, शरीर के ताप को मणिपुर चक्र निर्देशित करता है। मणिपुर चक्र का रंग पीला है
यह वात, पित्त, कफ तीन दोषो पर आधारित है। इसका तत्व अग्नि है। इस केंद्र पर दस योग नाडिया मिलती है।
मणिपुर चक्र के जाग्रत होने के फायदे
- इस चक्र पर ध्यान लगाने से वात, पित्त, कफ ये तीन दोष शांत कर सकते है।
- आपकी अंतर्दृष्टि में निखार आता है।
- एक दृढ़ और सक्रिय मणिपुर चक्र अच्छे स्वास्थ्य में बहुत सहायक होता है और बहुत सी बीमारियों को रोकने में हमारी मदद करता है।
- जब इस चक्र की ऊर्जा निर्बाध प्रवाहित होती है तो संतुलन और शक्ति बनाए रखता है।
- स्पष्टता, आत्मविश्वास, आनन्द, आत्म भरोसा, ज्ञान, बुद्धि और सही निर्णय लेने की योग्यता जैसे बहुमूल्य गुण प्राप्त होते हैं।
मणिपुर चक्र जागृत होने के लक्षण
- यह चक्र जागृत होते ही भोजन अच्छी तरह से शीघ्र पच जाता है इसलिए शरीर मैं तेजस्विता प्रकट होने लगती है।
- इस चक्र के जाग्रत होने से शरीर में विद्यमान अग्नि तीव्र हो जाती है ।
