शिवरात्रि का तत्व दर्शन
शिव एवं शक्ति के एकात्मक स्वरूप प्राप्त तकरने के पावन पर्व महाशिवरात्रि पर्व की आप सभी आत्मीय परिवार जनों को हार्दिक शुभकामनाएं।
👏 शिव एवं शक्ति की कृपा आप सब परिवार जनों पर हमेशा बनी रहे।
🔥🚩आओ इस पुण्य अवसर पर हम महाशिवरात्रि पर्व के वास्तविक तत्व दर्शन को समझें— शिव अर्थात कल्याणकारी विचारधारा ,परोपकारी विचारधारा ,मानव मात्र ही नहीं प्राणी मात्र का हित संधान करने वाली विचारधारा। जब तक कल्याणकारी विचारधारा शक्तिहीन रहती है ,तब तक संसार में उसके भावों का कोई भी सत् परिणाम परिलक्षित नहीं होता किंतु जब कल्याणकारी विचारधारा शक्ति से संयुक्त हो जाती है तो फिर वह इस संसार के लिए उन महत्वपूर्ण कर्तव्यों का निर्वहन कर पाने में समर्थ होती है जिन्हें करने पर मानव मात्र के साथ प्राणी मात्र का हित संधान होता है। शिव एवं शक्ति का यह मिलन पर्व स्पष्ट संदेश देता है कि शिव शक्ति के बिना सिर्फ शव ही रह जाता है। शिव ,शिव तभी बन पाता है जब वह शक्ति से सराबोर होता है। जब मां आदिशक्ति शिव का दामन थाम लेती है तभी वह कल्याणकारी परिदृश्य को संपूर्ण ब्रहमांड में विस्तृत कर पाने में समर्थ होता है। शिव अपने मूल स्वरूप में सिर्फ शव अर्थात अक्रिय तत्व है। इस अक्रिय तत्व में क्रिया, शक्ति के मिलन के परिणाम स्वरूप उत्पन्न होती है और उसी मिलन की वेला को महा शिवरात्रि नाम से संबोधित किया गया है। शिव एवं शक्ति के मिलन की यह प्रक्रिया वास्तविक तत्व दर्शन के आधार पर समझा जाए तो हमारे शरीर के अंदर ही घटित होती है और यह स्थिति हमारे शरीर के अंदर नित्य प्रति संपन्न की जा सकती है और वास्तविक रूप में शिवरात्रि मनाने का लक्ष्य उसी दिन सिद्ध होता है ,जब हमारे शरीर में मूलाधार चक्र में सोई हुई मांँ आदिशक्ति स्वयं ऊपर उठकर के सहस्रार स्थित परमपिता परमात्मा सदा शिव से एकाकार हो जाती है अर्थात हमारी चेतना अपने संपूर्ण विकारों से रहित होकर के विकार रहित श्वेत शीतल स्फटिक के समान दिव्य तत्व शिव में विलीन हो जाती है ,तब हम स्वयं शिव एवं शक्ति के वास्तविक स्वरूप को जान पाते हैं और वहीं से इस संसार के हित में कार्य करने की सामर्थ्य भी अर्जित कर पाते हैं क्योंकि इस स्थिति में शक्ति भी है और कल्याणकारी विचारधारा भी है । यहां पहुंचने के बाद व्यक्ति वह नहीं रह सकता जो वह पहले था बिल्कुल भी यह संभव नहीं है। यहां पर कुछ भी अपना नहीं और कुछ भी पराया नहीं । सिर्फ सत्य ,धर्म, न्याय एवं प्राणी मात्र का हित संधान ही अपना हित है यह इस स्थिति पर पहुंचने के बाद ही साधक को स्पष्ट रूप से अनुभव होता है। फिर स्वार्थ का दृष्टिकोण बदल जाता है। पहले जो कुछ अपना हित दिखाई देता था ,वह अब अहित दिखाई देने लगता है और जो पहले अहित दिखाई देता था उसी में वास्तविक हित दिखाई देने लगता है। इसलिए आओ सच्चे अर्थ में अपने अंदर उतरकर के प्रतिदिन शिवरात्रि मनाने का सौभाग्य प्राप्त करें। मां आदि शक्ति कुंडलिनी के पथ पर आगे बढ़कर।
🚩👏 एक बार फिर से आप सभी आत्मीय परिवार जनों को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ।शिव एवं शक्ति की कृपा आप सब पर हमेशा बनी रहे।
⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️
🚩🔥 हर हर महादेव 🔥🚩
